राष्ट्रसेवा ही ‘विकसित भारत’ की नींव है। सिविल सेवा दिवस के गौरवशाली अवसर पर आइए, अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को विकास की मुख्यधारा से जोड़कर सशक्त, समृद्ध एवं संवेदनशील भारतवर्ष के निर्माण का संकल्प दोहराएं।
शीलं परहितासक्तिः अनुत्सेकः क्षमा धृतिः।
अलोभश्चेति विद्यायाः परिपाकोञ्चलं फलम्॥