कुछ युवाओं ने मुझसे पूछा, "दया, कृपा, क्षमा, संवेदना आदि सभी अच्छे गुण हैं। फिर आप करुणा को उनसे अलग क्यों कर रहे हैं?"
मैंने उन्हें चार कारण बताए:
पहला- करुणा कोई भावना नहीं है, बल्कि खुद को और समाज को बदलने वाली क्रांतिकारी शक्ति है।
दूसरा- बाकी सभी गुण सीखने के लिए अच्छे हैं, लेकिन करुणा जन्मजात मिली ताकत है।
तीसरा- भलाई के ज्यादातर काम दूसरों के दुख, दर्द पर मलहम तो लगा सकते हैं, लेकिन करुणा उनके कारणों
को जड़ से खत्म करने की कोशिश करती है।
और, चौथा- जाति, संप्रदाय, रंग, गरीबी-अमीरी और स्त्री-पुरुष जैसे भेदभाव और अन्याय का अंत किसी भी कोमल भावना से नहीं हो सकता। वह सिर्फ करुणा की शक्ति से ही संभव है, जो दूसरों की तकलीफ को अपनी तरह महसूस करने से उपजती है और समझदारी से उनके खिलाफ संघर्ष कराती है।
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