हमारी शिक्षा पद्धति उत्पादकता और रोज़गार-परकता से रहित तथा अंकों की गलाकाट प्रतियोगिता पर चलती है।दूसरी ओर हर कीमत पर ज़्यादा से ज़्यादा कमाई कर लेने की माँ बाप की अंधी दौड़ है।इन दबावों में हमारे बच्चे मानसिक बीमारी के शिकार बन रहे हैं। मेहरबानी करके अपने बच्चों के दोस्त बनें।