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आज मेरी टेबल पर रामायण रखी देखकर मेरे एक सहयोगी ने पूछा- "राम और रावण में मूल अंतर क्या है?" मैंने उत्तर दिया- "रावण अपार ज्ञान, सत्ता और संपत्ति के गठजोड़ पर टिकी, करुणा विहीन व्यवस्था का प्रतीक है। ऐसी व्यवस्था विध्वंसकारी होती है और उसका अंत निश्चित है। वहीं राम, एक साधारण मनुष्य के भीतर छिपी परिवर्तनकारी करुणा की असीम शक्ति के प्रतीक हैं। राम की पूजा करुणा की जीत है, और रावण का विनाश करुणा-विहीनता की हार है।

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