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ऐसी घटनाएं हमारी आजादी और संविधान पर तमाचा है। धर्म, ईश्वर और मानवता का अपमान है।1988 में दलितों को साथ लेकर नाथद्वारा मंदिर में प्रवेश (जो वर्जित था) की कोशिश में हुए प्राणघातक हमले में लगी चोटों में दर्द अभी नहीं गया। मेरी अपील है कि छुआछूत बरतने वालों का सामाजिक बहिष्कार करें।

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