आज पराधीनता के रूप बदल चुके हैं। पता भी नहीं चलता कि कब विज्ञापन, सोशल मीडिया,आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आदि ने हमें मानसिक तौर पर पराधीन बना लिया। या फिर किस तरह से अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की शर्तें, कर्ज और अनुदान आदि राष्ट्रों की नीतियों और फैसलों को पराधीन बनाते हैं।
भारत अनादिकाल से समाधानों की धरती रहा है।आज की जटिल वैश्विक समस्याओं का समाधान करुणा के वैश्वीकरण से संभव है।
आज के दैनिक हिन्दुस्तान में मेरा आलेख पढ़ें।
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