यह मेरे लिए बहुत भावुक क्षण था। लक्ष्मण मास्टर अपने छोटे बेटे राहुल के साथ मिलने आए। वह आज ही चार्टर्ड एकाउंटेंट बना है। हमने लक्ष्मण जी को 1983 सुप्रीम कोर्ट की मदद से पत्थर खदान में बाल बंधुआ मजदूरी से मुक्त कराया था। वे हमारे संगठन के कोषाध्यक्ष और हमारी प्रेरणा हैं। उनका बड़ा बेटा इंजीनियर और दूसरा एमबीए है। 40 साल पहले अपने हाथों से रोपे गए पौधों के मीठे फल देखकर भला कौन भावुक नहीं होगा?
मैं हमेशा कहता हूँ, एक पीढ़ी को बचा लीजिए। अगली सभी पीढ़ियाँ अपने आप संभल जाएँगी।
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